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वह और उसका अस्तित्व

कल एक व्यक्ति मिला, बहुत तनाव में नजर आ रहा था। मैंने पूछा, "क्या हुआ, इतने तनाव में क्यों हो?"

वह बोला, "तनाव में नहीं हूं, लेकिन बहुत कंफ्यूज हूं।"

"क्यों, क्या हुआ?"

वह बोला, "घरवाले लड़की की तलाश कर रहे हैं।"

मैंने कहा, "अरे वाह! तो यह तो अच्छा है!"

वह बोला, "क्या अच्छा?"

मैंने कहा, "देखो, कुछ लड़के परेशान होते हैं क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें लड़की नहीं ढूंढ कर देते, लेकिन तुम्हारे माता-पिता तुम्हारे लिए लड़की ढूंढ रहे हैं और तुम तनाव में हो।"

वह बोला, "ऐसा नहीं है, मैं थोड़ा कंफ्यूज हूं।"

"लड़की जॉब करने वाली चाहिए या पूरी तरह से घर संभालने वाली चाहिए?"

उसके सवालों को सुनकर मैं थोड़ी उलझन में पड़ गई कि क्या जवाब दूं...

असल में यह बहुत बड़ा सवाल था...

क्योंकि अगर जॉब करने वाली लड़की ढूंढी तो उससे एक अच्छे गृहिणी की उम्मीद नहीं की जा सकती, और एक अच्छे गृहिणी से ये उम्मीद रखना कि वह जॉब भी करे, यह भी सही नहीं है।

सच कहें तो इस दुनिया का सबसे बड़ा काम एक हाउसवाइफ का होता है। वह दिनभर थक कर रात में सोते हुए अगले दिन की योजना बनाती है। सुबह उठते ही पति का टिफिन, बच्चों का टिफिन, चाय, पानी, सब कुछ उन्हें चाहिए वैसा तैयार करती है। दिनभर घर का काम करती है, घर में बाकी लोगों को क्या पसंद है, क्या नहीं पसंद है, यह भी देखती है। बच्चों का पढ़ाई, उनका ध्यान रखना, उन्हें संस्कार देना, उनकी हर जरूरत का ख्याल रखना, अगर घर में कोई बीमार हो तो डबल ड्यूटी करनी पड़ती है। घर में रिश्तेदार आए तो उनका आदर-सत्कार करना, अगर किसी की मृत्यु या शादी हो तो उसमें शामिल होना, त्योहारों के समय घर की सफाई करना।

इसी तरह की अनगिनत जिम्मेदारियां एक महिला को निभानी होती हैं जो पूरी तरह से घर संभालती है। यह सब वही कर सकती है जो पूरी तरह से घर संभालती है। इतना ही नहीं, इससे ज्यादा भी वह कर सकती है, और यह करते हुए हम उससे यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह जॉब भी करे। यह करना संभव नहीं है।

जॉब करने वाली और अच्छे घर संभालने वाली लड़की एक ही सिक्के के दो पहलू होते हुए भी एक-दूसरे के विपरीत होते हैं। ऐसा नहीं है कि जॉब करने वाली लड़की घर नहीं संभाल सकती, लेकिन जिस तरह एक पूर्णकालिक गृहिणी घर संभालती है, अपना सब कुछ उस घर के लिए अर्पित करती है, उसी तुलना में जॉब करने वाली कहीं न कहीं पीछे रह जाएगी।

जॉब करने वाली महिलाएं तनावमुक्त नहीं होतीं, ऐसा नहीं है। घर में वह भले ही कुछ न कहें, लेकिन उन्हें भी बहुत तनाव होता है। जहां काम करती हैं वहां की राजनीति, काम का बढ़ता हुआ बोझ, जिम्मेदारियां, काम से रोजाना का सफर, सफर के दौरान की धकापिटी। उसमें भी एक महिला के रूप में उसे "आओ, चलो चुगली करें" वाले ग्रुप की सदस्य होना पड़ता है, यह भी एक और तनाव होता है। ऐसी अनगिनत बातें होती हैं, जिनका सामना उसे करना पड़ता है। इतने काम करने के बाद घर में आकर घर के काम करना, सच में यह उसके लिए मुमकिन नहीं होता, और अगर वह कर भी ले, तो उसका गुस्सा बहुत बढ़ जाता है, जिससे बेवजह झगड़े होने लगते हैं।

मैंने उसे अपनी ओर से समझाने की कोशिश की, लेकिन उसका अगला सवाल था,

"जॉब करने वाली लड़की से तो क्या परिवार डिस्टर्ब नहीं होगा?"

"क्या वह मुझे समय दे पाएगी?"

ऐसे अनगिनत सवाल उसके दिमाग में थे।

उसके विचार भी सही थे, जैसा काम की जगह पर महिलाओं के साथ होता है, वही पुरुषों के साथ भी होता है। इसलिए कम से कम घर आने पर उसे गर्म खाने का कोई आनंद तो मिलना चाहिए, घर में खुशहाल और स्वस्थ माहौल होना चाहिए, यही उनकी इच्छा होती है। लेकिन अगर वह जॉब करती है तो उसे इन सब चीजों के साथ कहीं न कहीं समझौता करना पड़ेगा। क्योंकि जैसे पुरुषों से अपेक्षाएं होती हैं, वैसे ही महिलाओं से भी होती हैं, इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन हमारा समाज पुरुष प्रधान है, इसलिए यह अपेक्षाएं सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं। क्योंकि काम से घर लौटने के बाद एक महिला को काम ही करना होता है, और वह करती भी है... लेकिन उसे करना पड़ता है। इस सबमें उसकी बहुत थकावट होती है, बहुत चिड़चिड़ापन होता है। इन सभी बातों का असर उसकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है, इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। और कोई ध्यान भी नहीं देता, क्योंकि वह एक महिला है, और उसे ये सब करना ही है, ऐसा समाज की सोच है। लेकिन अगर यह सोच बदल जाए तो परिवार में कोई परेशानी नहीं होगी, और शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक दृष्टि से वह सक्षम हो सकती है। बस उसे थोड़ा समझने की जरूरत है।

उसने जो बात कहीं, वह कहीं न कहीं उसे सही लग रही थी, लेकिन उसका अगला सवाल था...

"जॉब करने वाली लड़की क्यों?"

असल में अगर आजकल की लाइफस्टाइल देखें तो एक ही व्यक्ति की सैलरी से सारे सपने पूरे नहीं हो सकते। बढ़ती हुई जरूरतें और महंगाई को देखते हुए, दोनों की सैलरी भी पूरी नहीं पड़ेगी। इसलिए घर के लिए थोड़ा हाथ बंटाना, ताकि एक पर आर्थिक दबाव न हो, यही कारण है कि दोनों को जॉब करना जरूरी है।

शादी के बाद एक महिला अपने पति पर पूरी तरह से निर्भर रहती है। भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता। मान लीजिए, पति को कोई दुर्घटना हो गई, या कोई बड़ा बीमारी आ गई, या वह किसी कारण से असमर्थ हो गया, तो उस स्थिति में क्या होगा? अगर घर की स्थिति अच्छी होगी तो वह शायद संभाल सकती है, लेकिन सच्चाई यह है कि कोई किसी का नहीं होता। एक महिला को अकेले ही सभी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

मेरी एक दोस्त थी, वह साधारण परिवार से थी, और उसने अपनी पढ़ाई पूरी की। तभी उसके लिए एक बहुत बड़ा रिश्ता आया। वह बहुत सुंदर थी, इसलिए लड़के के परिवार ने उसे अपनाया। फिर उसके परिवार वालों ने उसकी शादी तय कर दी। उसे आगे पढ़ाई करनी थी, नौकरी करनी थी, लेकिन उसका सपना सपना ही रह गया। ससुराल बहुत बड़ा और राजनीतिक घर था, सब सुख-सुविधाएं उपलब्ध थीं। किसी भी चीज की कमी नहीं थी। वह खुश थी, उसका पति हमेशा उसके साथ रहता था। वह बिना किसी चिंता के जीवन जी रही थी।

लेकिन शादी के 9-10 साल बाद एक दिन उसके पति शिमला गए, और ट्रेकिंग करते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह वहीँ मर गए। यह खबर घर पहुंची और उसकी ज़िन्दगी बदल गई।

उसने बाद में B.Ed किया और आज सरकारी स्कूल में काम करती है।

सारांश यह है कि वक्त कभी किसी को बताकर नहीं आता, एक महिला को इतनी सक्षम होना चाहिए कि किसी भी हालात का सामना कर सके।

मैंने उसे एक उदाहरण दिया,

मेरे भाई के एक दोस्त को एक अच्छी IT कंपनी में काम मिलता था, और उसने अपनी पत्नी भी उसी फील्ड से चुनी। उसकी पत्नी को किचन का भी कुछ पता नहीं था, क्योंकि वह बचपन से पढ़ाई के लिए बाहर शहर में रही थी। उसे चाय और मैगी बनाना ही आता था।

फिर धीरे-धीरे उसने बहुत मेहनत की और आज वह बेहतरीन खाना बना सकती है। यह सब रातोंरात नहीं हुआ, इसमें बहुत समय लगा। और उसका असली श्रेय उसकी सास को जाता है जिन्होंने उसे सब कुछ सिखाया।

इससे साफ है कि जॉब करने वाली महिलाओं से परिवार डिस्टर्ब नहीं होता, और एक दूसरे को समय देना ही सबसे अहम है।

सिर्फ यह आवश्यक है कि परिवार एक-दूसरे की जरूरतों और अपेक्षाओं को समझे और एक दूसरे का समर्थन करे, ताकि दोनों अच्छे से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।

अंत में, मैंने उसे यह कहा, "जो भी लड़की तुम चुनोगे, उसे सिर्फ एक इंसान के रूप में देखो, न कि कामवाली या पैसे कमाने की मशीन के रूप में।"

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