ब्रेन ड्रेन क्या है?
1960 के दशक में ब्रेन ड्रेन या मानव प्रवास की अवधारणा उभरी, जब कुशल कामगारों ने गरीब या विकासशील देशों से विकसित देशों में बेहतर नौकरी के अवसरों की तलाश में पलायन करना शुरू किया। यह मुख्य रूप से इस तथ्य के कारण हुआ कि भारत जैसे विकासशील देश अपने युवाओं को उपयुक्त अवसर प्रदान करने में पूरी तरह असफल रहे। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2024 तक लगभग 87,000 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी है।
इससे राष्ट्रीय संपत्ति का बड़ा नुकसान हो रहा है।
ब्रेन ड्रेन के प्रमुख क्षेत्र
ब्रेन ड्रेन मुख्य रूप से डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, एमबीए, सीए और अन्य पेशेवरों के क्षेत्र में देखने को मिलता है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में पहचान बनाते हैं। आज कई भारतीय नासा, कैलिफ़ोर्निया लैबोरेटरी, दुबई के स्वास्थ्य क्षेत्र और अन्य बड़ी कंपनियों में उच्च पदों पर काम कर रहे हैं। भारतीय सबसे मेहनती, समर्पित और ईमानदार कामगारों में से एक हैं, इसी कारण विभिन्न देश और कंपनियां उन्हें अपने यहां आसानी से स्वीकार करती हैं।
यूएसए, यूके, जर्मनी, फ्रांस, रूस, इटली, जापान आदि देशों ने अपने तकनीकी, विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर और खगोलशास्त्र में बड़े पैमाने पर विकास किया है। इस कारण ये देश गुणवत्तापूर्ण और बड़ी संख्या में नौकरी के अवसर प्रदान करते हैं।
कारण
इन देशों द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं, पैकेज और छात्रवृत्तियां भारत के मुकाबले कहीं बेहतर हैं। ऐसी स्थिति में, युवा छात्र/पेशेवर उच्च शोध और शिक्षा के लिए विदेश जाना पसंद करते हैं, क्योंकि भारत में उन्हें सर्वोत्तम अवसर, संसाधन और सुविधाएं नहीं मिलतीं।
भारत के सर्वोत्तम संस्थानों में प्रवेश के लिए कटऑफ लगभग 100% के करीब पहुंच गया है। जब संस्थान सबसे अच्छे छात्रों को आकर्षित करने की दौड़ में होते हैं, तो कई महत्वाकांक्षी युवा प्रतिष्ठित भारतीय विश्वविद्यालयों में जगह पाने में असफल हो जाते हैं। इस कारण वे विदेशों में उच्च शिक्षा के अवसर खोजते हैं।
विदेशों में उच्च पदों पर कार्यरत भारतीय
इनमें से अधिकांश छात्र बेहतर नौकरी के अवसरों और आकर्षक वेतन पैकेज के कारण विदेशों में ही रहना पसंद करते हैं। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप में सार्वजनिक सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी सुविधाएं भी उन्हें आकर्षित करती हैं। जब वे वैश्विक अवसरों से परिचित हो जाते हैं और उच्च जीवन स्तर और सुविधाओं का आनंद लेने लगते हैं, तो आमतौर पर वे अपने देश वापस नहीं लौटते।
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, और पेप्सिको की पूर्व अध्यक्ष व सीईओ इंद्रा नूयी जैसे कई भारतीय वैश्विक कंपनियों में शीर्ष पदों पर हैं। अमेरिका में 12% वैज्ञानिक और 38% डॉक्टर भारतीय हैं, और नासा में 36% वैज्ञानिक भारतीय हैं।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
इस स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए भारत सरकार ब्रेन ड्रेन या मानव प्रवास को रोकने के लिए कई योजनाएं चला रही है।
सबसे अधिक ब्रेन ड्रेन चिकित्सा क्षेत्र में देखा गया है। डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर पलायन को देखते हुए सरकार को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया गया। अब, उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले मेडिकल छात्रों को शिक्षा पूरी होने के बाद भारत लौटने का वचन देते हुए सरकार के साथ एक बांड पर हस्ताक्षर करना होगा।
समाधान
सरकार को उत्पादन, शोध और विकास में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेश को प्रोत्साहित करके छात्रों के लिए बेहतर रोजगार सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। हमारे देश के आईटी पेशेवर और आईआईएम स्नातक दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं। सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में अपनी प्रगति को तेज करने के लिए हमें देश की सर्वोत्तम प्रतिभा का उपयोग करना चाहिए।